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अनाथ


मांँ की ममता , आँचल की छांवखड़ा मैं हूँ , हो माँ के पाँवचाहत है मिले माँ सबको ज़रूरमुझमें ये तडप है तो मेरा क्या कुसूर !!#अनाथ

— बाबू प्रेम अमर
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