मालूम है हमें उसकी कातिल है अदा

वो चाहती है देना मोहब्बत की सजा

ज़हर है आग है फंदा भी लगा रखा है

उसने मेरी मौत का जाल बिछा रखा है

प्यार में उसके मर भी न सके हम

तो "अमर" ऐसे प्यार में भी क्या रखा है ?

               बाबू प्रेम "अमर"