नज़रें फिर से देखना चाहती हैं,
लब फिर से बोलना चाहते हैं।
हृदय फिरसे सुनना चाहते हैं।
-वो लम्हें, वो पल, वो शब्द
जो गुजर गए हैं।
-गली में कूदता बचपन
और चैराहे पर राहें खत्म
बस इतना ही था अपना बचपन
दिल फिरसे उन्हें जीना चाहे
-वो लम्हें वो पल जो गुजर गए हैं।
-मोहल्ले की धमाचौकड़ी
लूडो की भरी टोकरी
अब कही खो गयी हैं,
वो बचपन की मासूमियत भी गहरी नींद में सो गयी हैं।
-नन्हें आंखों के सपने अब बड़े हो गए हैं,
जिन हाथों में थी गोटियां
वो अब नोटों के भीड़ में कही खो गयी हैं।
-बस एक सपना हैं, बीते हुए कल से साक्षात्कार
-वो लम्हें , वो पल जो गुजर गए हैं