क्या भरा है दिल में खुद के अगर देखना है ये ,कलम को काग़ज़ पर बिन सोचे चलाइए ,लिखना चाहोगे भी अगर दुनिया भर की दास्तान ,दास्तान-ए-खुद के सिवा कुछ लिख ना पाओगे !
क्या भरा है दिल में खुद के अगर देखना है ये ,कलम को काग़ज़ पर बिन सोचे चलाइए ,
लिखना चाहोगे भी अगर दुनिया भर की दास्तान ,दास्तान-ए-खुद के सिवा कुछ लिख ना पाओगे !