कुछ बड़े लोगों की निशानियां है मुझमे,
पुराने किस्से और कुछ नयी कहानियां है मुझमें।
कभी होता हूं मैं बेमानी इक हद तक,
कभी होती लफ्जों की रवानियां है मुझमें।
घिरा हूं मैं वैसे तो लोगों से बहुत आजकल,
पर खुद में ही छिपी बहुत वीरानियां है मुझमें।
रखे हुए हूं ताअल्लुक जिनसे ईमान पर मैं,
देखकर बेईमानी उनकी, हैरानियां है मुझमें।
'अज़हर' मैं खुद से ही कहता हूं अकसर इन दिनों,
लोग समझते है तजुर्बेकार पर अभी नादानियां है मुझमें
