मेरी बातों में ना आना
मैं बड़ा बेईमान हूं।
वफादार अब रहा नहीं मैं
क्योंकि जानवर नहीं, मैं इंसान हूं।
गुनाहों की खुली दुकान हूं
मैं तहज़ीब का खंडहर मकान हूं।
नफरतों के धुंए का काला आसमान हूं
जाति-धर्म की लड़ाई का तीर-कमान हूं।
मैं रावण,कंस और इबलीश बन गया
अब ना मैं ईसा,अली और हनुमान हूं।
हां मुझमें इंसानियत तो बची नहीं
फिर भी मैं इंसान हूं, हां मैं इंसान हूं।

