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परवाह


लोगों की परवाह नही है फिर भी जाने क्यों,हम में उस गली से गुज़रने की हिम्मत नही।

एक ही बार में तुम्हें जो कहना है कह दो,हम में ये बारबार मरने की हिम्मत नही।

— आज़ाद
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