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इज़्ज़त


जबतक उसके हाथ में अपनी कमाई देते थे,हम ना पुकारे फिर भी उसको सुनाई देते थे।

एक दौर ऐसा भी गुज़रा है ज़िन्दगी में हमारी,हम बीमार पड़ने से पहले लोग दवाई देते थे।

— आज़ाद
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