मुझे तुम पास आकर सँभालो ज़रा न खो जाऊँ यहाँ मैं बचालो ज़रा कहीं ये पेड़ ही हो न जाए धुआँ जली इस आग को तो बुझा लो ज़रा
जो सोया ख्वाब कबसे है अंदर कोई उसे थोड़ा हिला कर जगा लो ज़रा गगन से यूँ तो बरसी हूँ कितने दफ़े समंदर में मुझे अब छिपा लो ज़रा ---आयुषी गुप्ता