क्या इतिहास
क्या समाज है
कुत्ता क्यूँ वफ़ादार
कुतिया क्यूँ अभिशाप है
गाली क्यूँ नही पुरुष के रिश्ते पर
क्यूँ स्त्री का अंग ही गाली है
माँ बहन तो हैं सबकी
पर दूसरे पर क्यूँ गाली हैं
बदल रहा युग इतना
पड़ती आज गालियों पर ताली हैं
माँ बाप के सामने
इतना सीधा बनते हैं
वही सुपुत्र बाहर गलियों में
लड़की को गाली बकते हैं
कभी उसके अंग पर गाली
कभी जाति के नाम की गाली है
अपने लिए जो शान इज़्ज़त की निशानी
दूसरे की हो तो गाली है
समाज के इन पढ़े लिखे लोगों से पूँछों
क्या होगा इतिहास उनका
कलंक बनेगे जाति पर अपनी
या नाक पर लिखना गाली है
गिरेबान मे झांक के देखें
अपने ही अंदर गाली पाएँगे
कोई सच्चाई बतादे अगर कि
तुम्हारा अस्तित्व ही
एक गाली है
माँ तुम्हारी तुमको पैदा कर के
बाद में पछताएँगी
क्यूँ की किसी दिन उसका भी कोई अंग
उसकी भी जाति गाली बन जाएगी
