
"प्रेम- पाश "
प्रियतम मेरे तुम हो जो पास
कट जायेंगे दुःख सुख साथ
हो रही मुझे प्रसन्नता अपार
अवतरण तुम्हारा हुआ आज ।
तुमने मुझको सम्मोहित कर
बतलायी मुझको हृदय बात ।
विह्वलता से मैं भर गयी
हृदय कलियाँ थीं फूट गयी
कैसा था ये प्रेम पाश ??
मन करता है जीवनपर्यन्त
हम देखें सावन बसंत साथ ।
आलिंगन तेरा पाकर मैं
कर लूँ शीतल अहसास
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