"प्रेम- पाश "
प्रियतम मेरे तुम हो जो पास
कट जायेंगे दुःख सुख साथ
हो रही मुझे प्रसन्नता अपार
अवतरण तुम्हारा हुआ आज ।
तुमने मुझको सम्मोहित कर
बतलायी मुझको हृदय बात ।
विह्वलता से मैं भर गयी
हृदय कलियाँ थीं फूट गयी
कैसा था ये प्रेम पाश ??
मन करता है जीवनपर्यन्त
हम देखें सावन बसंत साथ ।
आलिंगन तेरा पाकर मैं
कर लूँ शीतल अहसास
छा जाए जीवन में मधुमास ।
सुगंधित सुमनों से चरण पखार
पहनाऊँ तुझको मैं प्रेम हार
ऐसा हो अद्भुत मिलन आज ।
पथ में तेरी परछाई बन
हर लूँ मैं तेरे कष्ट हजार
यादों के धागे संग प्रिय
जी लूंगी मैं जीवन हजार ।
प्रेम की पाती आज प्रिय
है समर्पित तुमको मनोभाव !!
~आयुषी मिश्रा 'शिखा '


