"नारी अस्मिता- एक प्रश्न "
विषय बहुत उत्पीड़क है
शारीरिक शोषण और बलात्कार
नित नारी का ये चीरहरण
कुंठित समाज का घोतक है ।
मानसिक पीड़ित ये पशुजन हैं
दृष्टि है इनकी हृदयाघात
गिद्धों की श्रेणी देखकर
उबल रहा है रक्तधार ।
चाहे वह छोटी बच्ची हो
चाहे वयस्क या वृद्धा हो
दुष्कर्म किया और मौत दिया
क्षम्य नहीं इनका अपराध ।
मामा चाचा भाई मौसा बन
किया इन्होंने विश्वासघात
सम्बन्धों का ये क्रूर जाल
घृणित है इनका व्यवहार
समाज करे इनका तिरस्कार ।
प्राप्त इन्हें संरक्षण है
महाधिपति व सत्ताधीशों का
जिसके कारण ये दुष्कर्मी
अपराध करते हैं बार- बार ।
भीष्म द्रोण की मौनसभा में
उपेक्षित है इनसे न्याय गुहार
उठो द्रौपदी बिगुल बजा दो
दुःशासन को मार गिरा दो ।
ललकार उठी प्रतिशोध की अब
मत मांगो इनसे अधिकार।
चुभती हैं सबको ये आवाजें
स्वयं करो तुम शक्ति बन
दुष्ट दानवों का संहार
चूड़ी दो न्यायाधीशों को उपहार ।
नारी अस्तित्व के रक्षण में
तुम सभी हो इसमें सूत्रधार ।।
~आयुषी मिश्रा' शिखा '
26/09/2020


