"चुप्पियाँ "


चुप्पियाँ

जो मृत्यु के समकक्ष हैं

अन्याय में सिर झुकाए

पगड़ी का मान उछालतीं

चुप्पियाँ ।


खतरनाक हैं

अपराध में भागीदार हैं

चुप्पियाँ ।


गलत को सही ठहराती

स्त्री सम्मान में ठोकर हैं

चुप्पियाँ ।


चाकू की धार सी नुकीली

पर क्यों नहीं सबको चुभती

चुप्पियाँ !!


~आयुषी मिश्रा 'शिखा '


30/09/2020