आज जिद है कि थोड़ा लिखूं

इस कोरे कागज को थोड़ा भरूं - ये खयाल भी मेरा मुझे रात को ही सताता है, ना जाने क्यूं तुमसे मोहब्बत करने को आज फिर ये दिल चाहता है।

हाँ आज लिखूंगा - लिखूंगा हर उस अक्स के बारे में जो मुझे तुम्हारा याद दिलाता है, हर उस शब्द के बारे में जो मुझे तुम्हारा याद दिलाता है।।

लिखूंगा आज की मैंने लिखना ही सीखा है तुम्हारी यादों को लिखकर , मैंने लिखना ही सीखा है तुम्हारी उन बातों को लिखकर । 

लिखूंगा आज और इतना लिखूंगा कि पढ़ने वाला भी जब अपनी आँखे बंद करेगा तो उसे तुम्हारी छवि नज़र आएगी और फिर वो भी मोहब्बत कर उठेगा हमारे उस मोहब्बत से जिसे मैं लिखूंगा।।

 

लिखूंगा आज थोड़ा ही लिखूंगा मगर इस कोरे कागज को भरूंगा।।