मोमबत्ती चर्च में जली कई हज़ार

पास के घरों में अंधेरा सा कर गया


चादरें मज़ार पर चढ़ी कई हज़ार

रात भर ठंड से फ़क़ीर मर गया


ऐ खुदा! गर है कहीं तो पूछता हूँ मैं

इस जमीं पे कैसा तू इंसाफ कर गया


पत्थरो पे चढ़ रहे पकवान थे, मगर

सीढ़ियों पर भूखा एक इंसान मर गया