यूं नहीं हर शख्स तुम पर ही फिदा है
बस तुम्हारी आँख में इक मयकदा है
लाख शक्लें देखता हूं महफिलों मे
तेरी मुस्कानें मगर सबसे जुदा है
मैं मुसलसल ताकता रहता हूं तुमको
सोचना, इसमें मिरा क्या फायदा है
रूठ जाती हो ज़रा सी बात में तुम
ये तुम्हारी कौन सी रंगीं अदा है
भूल जाती हो मुझे तुम याद करके
ये बताओ ये कहां का कायदा है


