हर पीर पुरानी लगती है ये चांद पुराना लगता है
तुमसे मिलकर हर पीड़ा का दर्द सुहाना लगता है
इक उसके मुस्कानें भर से अंबर भी बरसने लगता है
ये चांद दीवाना है उसका इक टक उसको ही तकता है
तुम पर आकर दुनिया का हर सच अफसाना लगता है
हर पीर पुरानी लगती है ये चांद पुराना लगता है
तुमसे मिलकर हर पीड़ा का दर्द सुहाना लगता है
जब वो अंगड़ाई लेती है हर मंजर रुक सा जाता है
उसके कानों का झुमका भी देख मुझे इतराता है
उसकी खातिर दुनिया का हर अपना बेगाना लगता है
हर पीर पुरानी लगती है ये चांद पुराना लगता है
तुमसे मिलकर हर पीड़ा का दर्द सुहाना लगता है...

