जो कल तक था कांख में खड़ा
आज वो है नीचे बिस्तर पर पड़ा
सांसे मेरी चलाई जा रही थीं
मौत मुझसे मिलने आ रही थीं
कर रहे थे सब मेरी सलामती की दुआ
पर मैं हार चुका था जिंदगी का जुआ
सब कुछ मैं हस्ते हस्ते सह गया,
"क्या गलती थी?" यह प्रश्न मेरा रह गया।
बचा न पाया एक नादान की जान
करने लगे सब वहा मेरा अपमान
कोशिश में मैने कोई कसर न छोड़ी
पर उन्होंने तो मेरी हड्डियां ही तोड़ी
कर तो सकता था मैं भी रण
किंतु हमेशा मदद का लिया था प्रण
खून से उन्होंने खेली होली
बंद कर गए थे मेरी बोली
छोड़कर चले गए मुझको अकेला
खत्म होने को आया था जिंदगी का मेला
तुम हत्यारे हो एक शक्स ऐसा कह गया,
"क्या गलती थी?" यह प्रश्न मेरा रह गया।
हुई अब दंडधर से मुलाकात
आए थे वो मुझको लेने साथ
लगाई मैंने उनसे यह आस
भुजा दो मेरी, उत्तर की प्यास
पूछा मैंने उनसे क्या था पाप
क्यों मिली सजा बताओ आप
शांत स्वर में बोले यम
तुमने तो लगाया था पूरा दम
दोष तुम्हारा कुछ न था
उन हत्यारों को यह पता न था
रणभूमि में हुई थीं जंग
उस जंग में तुम रह गए कम
उस जंग में तुम रह गए कम।
