बहुत ऊँची दुकानों में

कटाते जेब सब अपनी।

मगर मज़दूर माँगेगा

तो सिक्के बोल जाते हैं।


कटा जब शीश सैनिक का

तो हम खामोश रहते हैं।

कटा एक सीन पिक्चर का

तो सारे बोल जाते हैं।


कहाँ पर बोलना है

और कहाँ पर बोल जाते हैं।

जहाँ खामोश रहना है

वहाँ मुँह खोल जाते हैं।


- आयुष मिश्र / @ayyushmishraa