हर सफर की याद लेकर,

फिर वही फरियाद लेकर,

कि कभी हम फिर मिलेंगे।

जानता हूं सच नहीं है,

पर उसे भी हक नहीं है,

रोज़ मुझ तक आ जाने का,

चंद आंसू ले जाने का,

ख्वाबों से बाहर किसी दिन,

फिर वही बातें करेंगे,

जब कभी हम फिर मिलेंगे।

इक कहानी जो गढ़ी थी,

बीते कल के कुछ दिनों में,

वहीं से शुरुआत होगी,

सर्द फिर से रात होगी,

साथ में हम भी चलेंगे,

किरदारों से भी मिलेंगे,

जब ये मौसम सख्त होगा,

लौटने का वक्त होगा,

एक झूठा वादा करके,

अपनी राहें हो चलेंगे,

कि कभी हम फिर मिलेंगे।।