एक चांद आसमां में उगता
जिसका काला सबको दिखता
एक मेरे अंदर भी दमके 
जिसका काला तुझको चमके

दिखता सुंदर उसका उजला
श्यामल उसको करता धुंधला 
दोनों अंश सभी मनभाते
मेरा अंश तुझे क्यों खटके

पूरक आंखें तेरी मेरी
नग्न कहीं है परत घनेरी
देख चकोरी अंखियों से
कर के ओझल धुंधला
दिखेगा तब सब उजला
                
                     आवाज़-ए-तृष्णा