Poetry 1 min read 616.4K reads

अदाकार


दुनिया ने अच्छा अदाकार बना दिया । लेकिन बचपन का किरदार दोहराने में, आज भी असमर्थ हूं।

— आवाज़-ए-तृष्णा
Read more Earn more Learn more