अंधकार का खौफ़ नही पर काले बहुत उजाले निकले , जिनको गंगा सा समझा था वो तो गन्दे नाले निकले , जिनको मौका दिया था हमने फलने और फूलने का ,  आस्तीन में पलने वाले वो विषधर काले निकले ,,