जिस राह पे चलते हुए थकते नहीं पाओं मेरे
मंजिल मिली तो जाना ये डगर तो मेरी माँ का था
जिंदगी को गुनगुनाते जीतना यूँ सीखा है
मैं थी कहाँ मुझमे वो तराना तो मेरी माँ का था


जिस राह पे चलते हुए थकते नहीं पाओं मेरे
मंजिल मिली तो जाना ये डगर तो मेरी माँ का था
जिंदगी को गुनगुनाते जीतना यूँ सीखा है
मैं थी कहाँ मुझमे वो तराना तो मेरी माँ का था