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एक रोज


इक रोज़ सफ़र में शाम हो तो शायदकभी तेरे कंधे पर सर रख कर आराम हो ।मैं चुप, तू चुप पर दोनो कोएक– दूसरे के बोलने का अहसास हो ।अवधू प्रिया।

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