अब जब कर ही दिया है हमे गुनहगार शाबित,

तो कुबूल करते हैं , तुमपे किए हर गुनाह को।

अब कुछ न कहेंगे अपनी वकालत मे,

बस इतनी सुनवाई करवा देना उस खुदा से,

सजा मे मुझे बस मेरे इल्जाम के साथ ,

आखिरी सांस तक तड़पने देना।

इश्क में किए जो भी जुल्म तुमपे,

उन जुल्मों की सौगात में , मुझे बिलकने देना।


अब हमें बेवफ़ा होने का ताज भी नवाजा है।

तो एक सजा की और गुहार करना, 

मुझे दफ़न होने तक , मोहब्बत में अधूरा ही रखना।

अब एक अर्जी तुमसे भी है ,

मेरे लिए खुद को कभी पिघलने मत देना।

किन सलाखों में कैद हूं,

उधर पहुंचने की कोशिश भी न करना।

और कभी डूंड निकालो मेरा पता,

तो मेरी हालत देख , मेरी रिहाई की गुहार न करना।

अब कुबूल कर लिया मैने, हर वो गुनाह जो तुमपे किया।

अब बस मुझे तरस खाने की कोई भूल न करना।।

गुनेहगार घोषित हुए हैं, मुझे मेरे गुनाह के फंदे में लटकने देना।