Poetry 1 min read 780.5K reads

दर्द


मै‍ लडा बहुत था, बन्ने को तेरा । मैं रोया बहुत था , दूर हो जाने से तेरा। मगर तेरे लब्जो के वार से यू आघात हुए, कि दर्द से आंखो के कैदी भी वही सूखे मर गए।

Read more Earn more Learn more