कब तक समझाएं खुदको
कब तक बात करें सबके जैसी...
हर उलझन से बेहतर है
इक लम्बी सी खामोशी...!!
तुम भी अपनी अना के मारे
हम भी तो हैं खुद से हारे
तुम भी खुद को मुक्त करो
और छोड़ो चेहरे से मायूसी..!!
हर उलझन से बेहतर है
इक लम्बी सी खामोशी...!!


कब तक समझाएं खुदको
कब तक बात करें सबके जैसी...
हर उलझन से बेहतर है
इक लम्बी सी खामोशी...!!
तुम भी अपनी अना के मारे
हम भी तो हैं खुद से हारे
तुम भी खुद को मुक्त करो
और छोड़ो चेहरे से मायूसी..!!
हर उलझन से बेहतर है
इक लम्बी सी खामोशी...!!