जो ठहराना नहीं चाहता,

जो रुकना नहीं चाहता—

उसे जाने दो।


जो बोलना नहीं चाहता,

जो सुनना नहीं चाहता—

उसे जाने दो।


जो समझाना नहीं चाहता,

जो समझना नहीं चाहता—

उसे जाने दो।


जाने दो उसे, क्योंकि वो तुम्हारे लिए मुक्कमल नहीं है।

जाने दो उसे, क्योंकि वो तुम्हारा कल नहीं है।


— अविनाश चौहान