ज़िंदगी किसी रूढ़ी सी थी,बदलाव की क्रांति हो तुमज़िंदगी किसी भ्रांति सी थी,ज़िंदगी के भटकाव की शांति हो तुम।ज़िंदगी मांझे से लिपटी धागे सी थी,पतंगों-सी उड़ती संक्रांति हो तुम।
ज़िंदगी किसी रूढ़ी सी थी,बदलाव की क्रांति हो तुम
ज़िंदगी किसी भ्रांति सी थी,ज़िंदगी के भटकाव की शांति हो तुम।
ज़िंदगी मांझे से लिपटी धागे सी थी,पतंगों-सी उड़ती संक्रांति हो तुम।