तुम्हारी सांसों ने तुम्हें मुझ तक पहुँचाया,
मैंने हवाओं से तुम्हारा पता नहीं पूछा।
तुम्हारी खुश्बू ने तुम्हें मुझ तक पहुँचाया,
मैंने तितलियों से तुम्हारा पता नहीं पूछा।
तुम्हारी रोशनी ने तुम्हें मुझ तक पहुँचाया,
मैंने जुगनुओं से तुम्हारा पता नहीं पूछा।
रहा मैं अपनी ही जगह पर खड़ा,
मगर किसी नक्शे से तुम्हारा पता नहीं पूछा।
— अविनाश चौहान
