जमीर भी कोई चीज़ होती है,

खुद को समझाया करो।

सुबह आईना देखकर,

शाम तक मर जाया करो।


इतने झूठे वादे कैसे कर लेते हो?

बीवी-बच्चों की नज़रों में

खुद को हीरो कैसे कह लेते हो?

अपने साए को इतना झूठ मत बतलाया करो,

सुबह आईना देखकर

शाम तक मर जाया करो।

— अविनाश