गलत थोड़े हम थे
गलत थोड़े तुम थे
जहाँ भी नजर थी वह तुम ही तुम थे
थी गलती हमारी हमने था चाहा
थी गलती तुम्हारी तुमने सराहा
मेरा सर झुका था तुमने उठाया
अँधेरे मैं जीना तुमने सिखाया
जिधर भी डगर थी वहां तुम ही तुम थे
गलत थोड़े हम थे गलत थोड़े तुम थे
जहाँ भी नजर थी वहाँ तुम ही तुम थे
:-कवि अवदेश शर्मा