
एक चाय का प्याला
यूँही एक कड़क चाय के प्याले को देखकर,
कुछ घर का सा अहसास हुआ,
देख रहा हूं चाय की पत्ती की खुशबू,
बाबुजी की तरह महक रही है,
ऐसी है कि जरा भी कम हो,
तो स्वाद गायब,
और ज्यादा होने से,
ना हो पीने की चाहत,
पानी तो मां सा है ,
जिस से मिलता है,
वैसा ही हो जाता है,
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