एक चाय का प्याला

 

 यूँही एक कड़क चाय के प्याले को देखकर,

कुछ घर का सा अहसास हुआ,

देख रहा हूं चाय की पत्ती की खुशबू,

बाबुजी की तरह महक रही है,

ऐसी है कि जरा भी कम हो,

तो स्वाद गायब,

और ज्यादा होने से,

ना हो पीने की चाहत,

पानी तो मां सा है  ,

जिस से मिलता है,

वैसा ही हो जाता है,

 चीनी कुछ ,मेरी पत्नी सी,

जैसे परिवार में एक

मिठास ले आती है,

अदरक इलायची की खुशबू,

बच्चों सा घर को

महकाती है,

दूध, प्रेम सा,

सब को एक सूत्र में

बांध देता है,

एक चाय का प्याला,

कभी कभी कितना सुख देता है ।।

एक चाय का प्याला,

कभी कभी कितना सुख देता है ।।

 

विवेक शर्मा