बात , बाग़ बहारों , चाँद सितारों की होगी ,
ज़ेब जिसकी गहरी,दुनिया उसी के इशारों की होगी ।
वो अब भी ठीक से ,समझ पाया नहीं भूख को,
भरे पेट में खाने की आदत , उसे सालों की होगी ।।
गाँव के बच्चे सैनिक बनें , शहरों के डाक्टर ,
ख्वाइश यही शायद , देश के हुक्मरानों की होगी । ।
हालत नाजुक है उसकी,गिरते शेयर बाजार देखकर,
कहाँ खबर उसे , जान गंवाते किसानों की होगी । ।
फिक्र रहती है,जब बच्चों के स्कूल में एसी चलता नहीं,
फुटपाथ के बच्चों को मिली सज़ा,उनके गुनाहों की होगी । ।