ये वर्ष विदा- ये वर्ष विदा तेरा आना नूतन, तेरा संग सुहावन , नित नए तज़ुर्बे देता , तेरा हर दिन मनभावन, तू अपनी रश्मि समेटे , खटटे मीठे अश्रु सहेजे यादों की गुल्लक में जाता , किन्तु मुझ में है नव प्राण जगाता ..! जीवन के इस पथ मेँ तू , छाया है एक अमिट, क्षण-क्षण तू बीता करता , मैं एक लड़ाई जीता करता कुछ नश्तर के चुभने पे भी, नित नवीन कमीजें सीता करता ...! वर्षों बीतें गें तेरे साझे , समझूगा , समहलूगा मैं दिन - दिन..! तू था कठोर , किन्तु सरल बड़ा था, था कुछ गरल , किंतु अमिय सरस था, तू कुछ पावन था, कुछ मादक भी, तू श्वेत रहा , तू श्याम रहा किन्तु धागों सा उलझा तेरा हर आयाम रहा, कोशीश की मैँने , तू कुछ सुलझा भी, कुछ डोरे टूटी, कुछ अपने छूटे झंझावातों में, कुछ गांठे पड़ी, कुछ खुली, कुछ अनखुली रही, कुछ ने रक्त पिया , कुछ अजनबियों ने प्यार दिया, कुछ अधरों पे सिसकी बोली, कुछ आँखो में घनश्याम रहा, पर तू था तो मैं जाना , तू ना होता तो मैं क्या होता, तेरे होने में अपनापन था, तेरे जाने में अपनापन है, तू जाता है तो खोता कुछ मैं हूँ, तू जाता है तो पाता भी मैं कुछ हूँ, शोक नही तेरे जाने में, हर्ष क्यों उसके आने में, तेरे ताने - बाने की हर सीख नई , कुछ नए छोर दिखे अब , उस डगर कदम बढ़ाता हूँ, तू पश्मीना की गर्मी देता , या रेशम की नरमाहट , ये सोच नही मेरी अब, मैं तो बस माटी में लिपटे चंद टूटे माझे जोड़, जीवन की नई लिहाफ बनाता हूँ, ऐ रश्मि जो डूब रही , धन्यवाद तेरा मैं करता हूँ, नव वर्ष के भोर मैं, प्रणय आह्लाद तेरा करता हूँ...! मेरे कल के साथी तुझे प्रणाम्...! मेरे नव सारथी तुझे प्रणाम्...!