थोड़ा सा आओ मतलबी हो जाएँ
गमों को कर किनारे खुशियाँ चुन लाएँ।
ज़िंदगी से आओ सौदेबाज़ी करें यूँ
खोकर भी हम पा जाएँ कुछ हर बार
दिल को भला ऐसे समझाएँ ना क्यूँ
खोजें कोई ऐसी तरकीब, ऐसा कोई क़ायदा
हर सौदे में जिससे हमारा हो थोड़ा फ़ायदा
मायूसी से चलो अज़नबी हो जाएँ
थोड़ा सा आओ मतलबी हो जाएँ।
जीत से अपनी ले लें थोड़ी खुशियाँ मनाने को
हार से लें तज़ुर्बा अगली बार जीत जाने को
न रुकें समझ खुद को कोई नाक़ाम क़िस्सा
जीत हो या हार दोनों खेल का ही हिस्सा
जो भी मिले उसको पूरा भुनाएँ
हर दौर से कुछ न कुछ सीख जाएँ
बेचारगी से चलो अज़नबी हो जाएँ
थोड़ा सा आओ मतलबी हो जाएँ।
मुश्किलों की तपिश में कुंदन सा हम निखर जाएँ
दुखों की आँधी में ही तो दिखावे के रिश्ते बिखर जाएँ
बुरे वक़्त में भी आओ ढूँढ लें कुछ अच्छा
मनमाफ़िक जो न हो, समझो उसे ईश्वर की इच्छा
ये सोच के हर इम्तिहान झेल जाएँ
डरे बिना बाधाओं से पार पाएँ।
ग़मों से भी थोड़ी खुशियाँ छान लाएँ
थोड़ा सा आओ मतलबी हो जाएँ।


