माँ
तुम तुम हो
और
मैं मैं हूँ
और ये जो मै है
यह चाहता है
तुम होना
प्यार करना बिना किसी चाह के
जागना रात के उन लम्हो में
जब नींद सब से तेज़ हो
या फिर
चारो तरफ तकिये लगाना
और मुस्कुराना आप ही
या की याद रखना अपने निवाले
और मेरे उल्टियां-दस्त को
फ़िक्र करना
परेशान होना
रो पड़ना
माँ
मैं सच कहता हूँ
कि चाहता हूँ तुम होना
इसलिये नहीं की
उतार दूँ तुम्हारे क़र्ज़
पर इसलिये कि
सिख लूँ निःस्वार्थ प्रेम
असीम खुशियां
और सब के लिया जीना।।