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अब हम मीत नहीं हैं

अब इन सूखे होठों पर वह अनायास गीत नहीं है तुम भी तो आकर कह दो की अब हम मीत नहीं हैं। चपल चंचला आँख तुम्हारी करती थी प्यारी मनुहारि उन भींगी कजरी आँखों में अब वह शोख नहीं है तुम भी तो आकार कह दो की अब हम मीत नहीं हैं। ले हथेलियाँ बारी बारी बना उँगलियों की गलबाहीं जो सपने हम तुम देखे
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