अब इन सूखे होठों पर वह अनायास गीत नहीं है तुम भी तो आकर कह दो की अब हम मीत नहीं हैं। चपल चंचला आँख तुम्हारी करती थी प्यारी मनुहारि उन भींगी कजरी आँखों में अब वह शोख नहीं है तुम भी तो आकार कह दो की अब हम मीत नहीं हैं। ले हथेलियाँ बारी बारी बना उँगलियों की गलबाहीं जो सपने हम तुम देखे थे अब वह आशातीत नहीं है तुम भी तो आकार कह दो की अब हम मीत नहीं है। जीवन, इस संग्राम में मैं अकेला चल पड़ा हूँ अब इन निर्जर राहों पर तनिक भी भयभीत नहीं हैं तुम भी तो आकर कह दो की अब हम मीत नहीं हैं। प्रेम वेदना बुझ चुकी है पर हृदयशीत नहीं है तुम भी तो आकर कह दो की अब हम मीत नहीं हैं।