हवाएँ सब जानती हैं
उनसे नही छिपा कोई भी किस्सा
वो जानती है विशाल समुंदर को रेगिस्तान मे बदलना
उड़ेल देतीं हैं मानसून हमारे खलिहानो में
वो गातीं हैं दुनिया के हर कोने का संगीत
पहचानती हैं सारे फूलों की सुगंध
उन्हें आता है सब कुछ उजाड़ देना
शायद वो बातें भी करती हों ईश्वर से
और उन्हें हाल सुनातीं हो उनकी धरती का
क्या हवाएं प्रेम करना जानती होंगी ?
अगर हाँ तो किससे ?
समुंदर से, रेगिस्तान से, घास के मैदानों से, पहाडों से
या किसी से भी नही।
वैसे वो नही जानतीं ठहर जाना
निरंतरता रोकती होगी उन्हे प्रेम करने से
पर वो जानती हैं भाषा प्रेम की
हमेशा खिडक़ी से गुजरते वक्त
हाल सुना जाती हैं
तुम्हारे शहर का
पूछ लूंगा इस बार की तुम सब जानती हो
पर क्या तुम जानती हो प्रेम करना ?


