फिर सुबह हुई फिर शाम हुई

फिर एक कोशिश नाकाम हुई

फिर सुबह हुई फिर शाम हुई

फिर ....एक उम्र बदनाम हुई

फिर सुबह शाम तो आम हुई

फिर पता नहीं कैसे गुजरी.. 

फिर पता नहीं कैसे बिखरी

फिर हुआ वही जो नहीं पता

फिर बेसब्री बेकाम हुई.......

फिर सांसों का एक ज्वार उठा

फिर एक हँसी समशान हुई

फिर सुबह हुई फिर शाम हुई.. 

✍✍✍ अतुल वर्मा