रोजा"तुम ये क्यूँ कहती हो तुमसे बात में क्या रखा हैजैसे तुमने दुनिया के हर शख्स को पढ़ रखा हैएक तुम हो जो मुझसे जुदा होने की चाहत रखती होएक मैं हूँ जिसने इस बार तुम्हारे नाम का रोजा रखा"
रोजा
"तुम ये क्यूँ कहती हो तुमसे बात में क्या रखा है
जैसे तुमने दुनिया के हर शख्स को पढ़ रखा है
एक तुम हो जो मुझसे जुदा होने की चाहत रखती हो
एक मैं हूँ जिसने इस बार तुम्हारे नाम का रोजा रखा"