पागल कहो तो कह लो
पागल नहीं हूँ लेकिन
दिल पे चोट लगी है
घायल नहीं हूँ लेकिन
जितनी भी खायिशें हैं
सब हैं तुम्हारे कदमों में
कर लो एक - एक पूरी
मोहलत नही है लेकिन
लिखने के मामले में
होंठों की तरह लिखता हूँ
तेरा तो मगर कागज ही
कोरा नहीं है लेकिन
जिसके लिए तू आती है
खुद को सजा धजा के
उसके जिगर में तेरे लिए
जगह नहीं है लेकिन
गर हो तेरी इजाजत तो
मैं भी एक राज खोलूँ
लाखों हैं मेरीआँखों में, पर
कोई तुझसा नहीं है लेकिन
........ अतुल वर्मा


