कभी नहीं सोचा था मैंने
कभी नहीं सोचा था मैंने
ऐसा भी होगा जीवन में
रोयेंगे हम हँसते हँसते
और हसेंगे मन ही मन में
कभी नहीं सोचा था मैंने
सूरज मेरा ढल जायेगा
तन तन्हा ही जल जायेगा
मैं मिट्टी हो जाऊँगा
आने वाले कुछ एक पल में
कभी नहीं सोचा था मैंने
उम्र की छाँव तले मैंने भी
खाबों का एक पेड़ लगाया
पर उसपे फल आने से पहले
पेड़ ही सूख गया पतझड़ में
कभी नहीं सोचा था मैंने
जान बूझकर पागल होना
आँख मूँदकर हर पल सोना
आखिर किससे सीख लिया
बेवजहा फँसना उलझन में
कभी नहीं सोचा था मैंने
क्या क्या मैंने सोंच लिया था
दुनिया भर को सोख लिया था
इतना भार मैं सह ना सका और
जस का तस ही फसा दलदल में
कभी नहीं सोचा था मैंने
कोई राह नहीं अब सूझ रही
एक चुप्पी मुझमें गूंज रही
पर ये जख्म दिखाऊँ किसको
सब तो व्यस्त हैं अपने कल में
कभी नहीं सोचा था मैंने
जो भी है अच्छा ही है
जीवन एक रेखा ही है
चलते रहना कर्तव्य हमारा
बाकी दुनिया पाकर भी कम है
कभी नहीं सोचा था मैंने
एक समय पर सबको लगता
कौन है जन्मा मुझसे अच्छा
यह सपना था पता है चलता
किंतु उसी के व्युत्क्रम में
कभी नहीं सोचा था मैंने
राहों को ही मंजिल समझा
और जिया भी इसी भ्रम में
बार-बार ही मिली सफलता
असफलता के सफल क्रम में
कभी नहीं सोचा था मैंने
जो गुजरी है पड़ी रहने दो
मुह है सबका सब कहने दो
क्यूँ चेहरे पर डालूं गमछा
क्या रखा है लाज शर्म में
कभी नहीं सोचा था मैंने
जिसने दिया है पहले मौका
उसी शख्स ने दिया है धोखा
कैसे हुआ है यह सब सोंचो
क्या चलता है किस के मन में
कभी नहीं सोचा था मैंने
किसी जन्म का मैं श्रापित हूँ
जिंदा हूँ पर जिंदा मृत हूँ
पर क्या इससे डर जाऊँ मैं,
नहीं सब संभव है कठिन श्रम में
कभी नहीं सोचा था मैंने
प्रिय साथी तुम चिंतित मत हो
लाभ हानि से विचलित मत हो
तुम उतना ही पीछे छूटे
जितना देर किया चलने में
कभी नहीं सोचा था मैंने
वैसे भी सबके जीवन में
आती है स्थिरता मन में
फिर क्या आगे फिर क्या पिछे
सब मिल जाते गंगा जल में
कभी नहीं सोचा था मैंने


