कहीं आसमान को छूये भवन

कहीं सड़कों पर कटता जीवन

यह सब क्या है हे ! मानव मन

यह सब क्या है हे ! मानव मन


कहीं पिज़्ज़ा बर्गर या है रम

कहीं एक वक्त की रोटी कम

यह सब क्या है हे !मानव मन

यह सब क्या है हे !मानव मन


किसी को बारिश भी लगती कम

कोई फांक रहा रेहू हरदम

यह सब क्या है हे !मानव मन

यह सब क्या है हे !मानव मन


कहीं नासा, इसरो एस्ट्रोनॉट

कहीं सुबह शाम बस रामायन

यह सब क्या है हे !मानव मन

यह सब क्या है हे !मानव मन


कहीं लाल लाल हैं गाल

और खुशहाल हैं सबके मन

कहीं भूखे, नंगे बच्चे घूम रहें

मैले - मैले लिए बदन

यह सब क्या है हे !मानव मन

यह सब क्या है हे !मानव मन


कोई उड़े बादलों से ऊपर

कोई डूब रहा है लिए थकन

यह सब क्या है हे !मानव मन

यह सब क्या है हे !मानव मन


कहीं भूख प्यास ,कहीं भोग विलास

कहीं खुद का जेट ,कहीं ट्रेन पास

कहीं दूब घास ,कहीं इलीट क्लास

कहीं हड्डी का तन, कहीं भरा मास

कहीं कीचड़ सब , कहीं पूरा साफ

कहीं मौज मस्ती, कहीं मन उदास

कहीं गिनती की रोटी ,कहीं बेहिसाब

कहीं नल, स्कूल न मिले ईलाज

कहीं अमेरिका सा हुआ विकास

कहीं कच्चे रास्ते लेटे हैं

कहीं उड़ती है बुलेट ट्रेन फास्ट

कहीं कुप्प अंधेरा छाया है

कहीं सूरज सा फैला प्रकाश


फिर भी कितना संतोषी मन

जो लिए फिर रहा अभी भी आस

होगा विकास.......

होगा विकास.......