हमनशीं


तेरी हंसी है बर्फ़ सी

दिल को मेरे देती जमी

ओ मेरी जां ओ हमनशीं

तू ही सूकूं तू जिंदगी

ओ मेरी जां ओ हमनशीं


एक पल को भी तेरी कमी

बढ़ने लगती है बेचैनी


ओ मेरी जां ओ हमनशीं


तेरे जिस्म की हर एक गली

टेढ़ी मेढ़ी ही है मिली

अपनी नजरों में मुझे रख

खो न जांऊ इसमें कहीं


ओ मेरी जां ओ हमनशीं


सबनम की लौ में जल रही

तेरे जिस्म की तृष्णगी

जिसमें डूबा जाता हूँ मैं

जिसमें खोई तू मिली


ओ मेरी जां ओ हमनशीं



# love❤ faiz

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