दिन निकल गया फिर से जाना जाना


ना मैंने तुमको समझा

ना तुमने मुझे पहचाना


दिन निकल गया फिर से जाना


यूँ गुमसुम गुमसुम रहते रहते

कहीं राह भटक ना जाना


दिन निकल गया फिर से जाना


ना दिल दिल से मिल पाया

ना दिल ने दिल को जाना


दिन निकल गया फिर से जाना


हम खुश हैं एक दूसरे से

फिर रहते क्यों है बिगड़े से

कोई और भी है क्या इस दुनिया में

गर हां तो मुझे बताना


दिन निकल गया फिर से से जाना


ना दूर है मुझसे जाना

ना पास है मेरे आना

क्या जिद है तुमने पाली

आखिर क्या तुमने ठाना


दिन निकल गया फिर से जाना


यह बेपरवाह मोहब्बत

यह दिल की चाह मोहब्बत

यह और है क्या क्या मोहब्बत

मैंने तो बस तुमको जाना


दिन निकल गया फिर से जाना


जब जब तुम मुझसे रूठे

 जब जब हम खुद से टूटे

बस एक चुप्पी का चेहरे पर

चुपचाप से आना जाना


दिन निकल गया फिर से जाना


कितनी पत्थर दिल हो तुम

कितनी मुश्किल मंजिल हो तुम

यह तुम्हें लग रहा आसां, पर

कितना है कठिन तुम्हें पाना


दिन निकल गया फिर से जाना


याद तुम्हें कर करके

अंदर अंदर ही घुटके

बिन बोले ही आँखों में

आँसू का भर जाना


दिन निकल गया फिर से जाना


जब जब हम पास से गुजरें 

कुछ-कुछ एक दूजे में उतरें

और नामुमकिन की राहों से

अब मुमकिन पर है आना


दिन निकल गया फिर से जाना


तुमने रौशन हर शाम किया

तुमने गिरते हुए थाम लिया

तुमने संग मेरे दर्द जिया

फिर अब मुझको क्यों ठुकराना


दिन निकल गया फिर से जाना


यह दुनिया रंग बिरंगी है

दौलतमंदों की संगी है

इस दुनिया में फस कर

गलती मत दोहराना


दिन निकल गया फिर से जाना


अक्सर इस नई सदी में

सब कुछ होता जल्दी में

इस भागदौड़ और जल्दी से

तुम खुद को सदैव बचाना


दिन निकल गया फिर से जाना


यह प्रेम तुम्हें मालूम है

है जीवन का खजाना

और सालों सदियों से कभी नहीं

होता है प्रेम पुराना


दिन निकल गया फिर से जाना


कई बार भटक जाता हूँ

कई बार तो थक जाता हूँ

कई बार मैं मुझसे कहता हूँ

उसे बार बार मुझमें लाना


दिन निकल गया फिर से जाना


अच्छा एक बात बताओ

गर तुम खुदको मुझसा बनाओ

तो क्या इसमें भी लगता है

कोई भारी-भरकम जुर्माना


दिन निकल गया फिर से जाना


तुमको मालूम है जान -ए-जाँना

मैं शायर हूँ अनजाना

बस कुछ मशहूर हुआ तुममे

कि तुमने भी किया बेगाना


दिन निकल गया फिर से जाना


प्रेम वही सच्चा है

जिसमें जारी रहता है

तकरार का आना जाना

एक का गुस्सा होना

और एक का उसे मनाना


दिन निकल गया फिर से जाना


यह परिचय यह रिश्तेदारी

यह भी है जीवन की क्यारी

इस क्यारी में फूलों की

एक नई पौध है लगाना

जिससे महकें हम दोनों इसमें

पल प्रतिपल , रोजाना


दिन निकल गया फिर से जाना


तुम तुम हो ..............

तुम अंजुम हो.........

तुम मेरे जीवन में शगुन हो

तुम हो मेरा वह प्रथम लक्ष्य

जिसको है मुझे प्रतिदिन पाना


दिन निकल गया फिर से जाना