ये इश्क भी है बेवजह

ना मुझे पता ना तुम्हें पता

ना मंजिलें ना रास्ता

ना कल का है ना आज का


ना भीड़ से कोई वास्ता

ना शून्य से कोई राब्ता

बस लेके भीगी पलकें एकटक

आसमां को ताकता


एक लफ्ज़ है बिछड़ा हुआ

एक ख्वाब है लापता

कोई खोज लाये मुझको तुमसे

कोई देख ले मिरा हादिसा

तू पास मेरे अक्स सा

मैं साथ तेरे कहकशाँ


एक पल को भी तू रिहा नहीं

एक पल को भी मैं थका नहीं

जिस ओर भी मैं देखता

तू चमचमाता चांद सा


ये इश्क भी है बेवजह


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