किसी शख्स से कोई रिश्ता नहीं निभायेंगे
मेरे कंधे मेरी अर्थी स्वयं उठायेंगे
जल जायेंगे, बुझ जायेंगे, खुद में आग लगायेंगे
खुद से प्यार करेंगे खुद पे जुल्म भी ढायेंगे
जो भी हमसे प्यार करेंगे उनसे प्यार निभायेंगे
खुद को मिट्टी में बोयेंगे
खुद की फसल उगायेंगे
बागी होकर, भूखे सोकर, तन्हा रोकर
कब तक दर्द छुपायेंगे
सच के लिए लड़ेंगे हरदम
सच पे जान लुटायेंगे
जो अनपढ़ हैं जो कायर उनको भी समझायेंगे
जनता को जो लूट रहें हैं
उनको हम खा जायेंगे
नेताओं को मार मार कर सरकारें दफनायेंगे
........ अतुल वर्मा


