देख कर हालांकि उसको यार मैं गश खा गया!
ये हुआ अच्छा उसी की गोद में रक्खा गया!
पीठ पीछे कौन किसको कह रहा क्या छोड़िए,
पीठ पीछे कौन है जिसको यहाँ बख़्शा गया!
आप के बस का नहीं है ढूँढ़ पाना 'आप' को,
आप के भीतर वहम है 'आप' तो कब का गया!
आदमी हर आदमी से है ख़फा बस इसलिए,
आदमी को लग रहा है वो ख़ुदा बन आ गया!
रूह का सामान जो दोयम लगा बाजार में,
घर उठा लाया उसे ज़िंदान में रक्खा गया!
छोड़ दो अब फ़िक्र करना बेवकूफी है मियाँ,
जो गया जैसे गया जाने कहाँ अच्छा गया!
अतुल कुमार राय,


